सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है । Sabse Bada Grah Kaun Sa Hai 

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सौरमंडल एक भव्य और अद्भुत स्थान है। इस सौरमंडल में कुल आठ छोटे-बड़े ग्रह हैं। इनमें बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, और नेपच्यून शामिल हैं। इस लेख में हम सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है इस के बारे में जानकारी देने वाले हैं। यह ग्रह केवल सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह ही नहीं है, बल्कि अन्य ग्रहों की तुलना में सबसे भारी भी है। यदि आप इसके बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो इस लेख को पूरा ज़रूर पढ़िए।

सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है । Sabse Bada Grah Kaun Sa Hai

सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है । Sabse Bada Grah Kaun Sa Hai 

सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति है और यह हमारे सौरमंडल का पाँचवाँ और सबसे बड़ा ग्रह माना जाता है। इसका व्यास लगभग 43,440.7 मील (69,911 किलोमीटर) है, जो हमारी पृथ्वी के व्यास का लगभग 11 गुना है। इसका द्रव्यमान लगभग 1.8986 × 10^27 किलोग्राम है, जो कि पृथ्वी के द्रव्यमान से लगभग 317.8 गुना अधिक है। इसका घनत्व लगभग 1.33 ग्राम/सेमी³ है।

यह ग्रह अपना एक चक्कर लगाने में केवल 9 घंटे 55 मिनट का समय लेता है, और इसे सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने के लिए लगभग 11.86 पृथ्वी वर्ष का समय लगता है। बृहस्पति ग्रह का तापमान लगभग -145 डिग्री सेल्सियस (-234 डिग्री फ़ारेनहाइट) होता है और इसके केंद्र का तापमान लगभग 24,000 डिग्री सेल्सियस (43,000 डिग्री फ़ारेनहाइट) हो सकता है, जो सूर्य की सतह के तापमान से भी अधिक माना जाता है। बृहस्पति जितनी गर्मी सूर्य से प्राप्त करता है, उससे दोगुनी गर्मी बाहर फेंकता है। इससे यह पता चलता है कि इसका अपना आंतरिक ताप स्रोत है।

बृहस्पति की चुंबकीय शक्ति हमारे लिए एक वरदान है। ऐसा माना जाता है कि धूमकेतु सौर मंडल के ग्रहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन अपनी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण, बृहस्पति धूमकेतुओं और अन्य क्षुद्रग्रहों को नियंत्रित कर लेता है। बृहस्पति की अद्भुत विशेषताओं और हमारे सौर मंडल में इसकी भूमिका के कारण, इसे “असफल तारा” और “वैक्यूम क्लीनर” के नाम से भी जाना जाता है।

यह ग्रह अधिक चमकदार और बड़ा होने के कारण, रात को इसे खुले आसमान में आसानी से देखा जा सकता है। इस ग्रह पर सदियों से एक तूफान चल रहा है, जिसकी चौड़ाई लगभग 16,000 किलोमीटर (10,000 मील) है। इस कारण इसे हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा तूफान भी माना जाता है। यह तूफान गहरे लाल रंग का होने के कारण “ग्रेट रेड स्पॉट” कहा जाता है।

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बृहस्पती ग्रह के बारे में रोचक जानकारी

  1. इस ग्रह का नाम रोमन देवताओं के राजा बृहस्पति के नाम पर रखा गया है।
  2. इस ग्रह की दूरी सूर्य से लगभग 77 करोड़ किलोमीटर है।
  3. सौर मंडल के अन्य सात ग्रहों के द्रव्यमान से ढाई गुना अधिक इस ग्रह का द्रव्यमान है।
  4. यह ग्रह अलग-अलग गैसों से बना हुआ है, जिसमें 90% हाइड्रोजन और 10% हीलियम की मात्रा है।
  5. वर्तमान में इस ग्रह के अपने खुद के 95 उपग्रह (चंद्रमा) हैं।
  6. अधिक द्रव्यमान होने के कारण इस ग्रह का गुरुत्वाकर्षण बल हमारी पृथ्वी से लगभग 2.65 गुना अधिक है।
  7. यह ग्रह अपनी धुरी पर सिर्फ 9 घंटे 55 मिनट में एक चक्कर पूरा करता है और इस कारण अन्य ग्रहों की तुलना में यहाँ सबसे छोटा दिन और रात होती है।
  8. इस ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र हमारी पृथ्वी से लगभग 20,000 गुना अधिक शक्तिशाली है।

बृहस्पती ग्रह की खोज

वैसे तो इस ग्रह को प्राचीन काल से ही जाना जाता है, पर इस ग्रह की विस्तृत जानकारी इटली के एक शास्त्रज्ञ गैलीलियो गैलिली ने 1610 में दी थी। इस खोज के लिए उन्होंने अपने खुद के बनाए हुए दूरबीन का इस्तेमाल किया था। इस खोज के दौरान उन्होंने बृहस्पति के साथ उसके चार उपग्रह (चंद्रमा) आयो, यूरोपा, गेनीमीड और कैलिस्टो की भी खोज की थी, जो बृहस्पति ग्रह की परिक्रमा कर रहे थे।

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बृहस्पती ग्रह पर भेजे गए अंतरिक्ष मिशन

इस अनोखे ग्रह के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने के लिए अनेकों अंतरिक्ष मिशन भेजे हैं। नीचे हमने इस ग्रह पर भेजे गए अंतरिक्ष मिशन की सूची दी है:

  • वर्ष 1973 में भेजे गए नासा के फ्लाईबाई मिशन के अंतर्गत ‘पायनियर 10’ यान ने सबसे पहले इस ग्रह की क्लोज़-अप चित्रों को कैप्चर किया था, और इसमें लाल रंग के तूफान और बादल दिखाई दिए थे।
  • उसके बाद, अगले ही वर्ष, 1974 में, नासा ने फिर से एक फ्लाईबाई मिशन के अंतर्गत ‘पायनियर 11’ नामक यान को इस ग्रह के परीक्षण के लिए भेजा था। इस मिशन के द्वारा इस ग्रह और उसके उपग्रहों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की गई थी।
  • नासा ने 1977 में दो और मिशन लॉन्च किए, वायेजर 1 और 2। इन दोनों यानों ने बृहस्पति को और अधिक और अच्छी तरह से चित्रित किया। वायेजर 1 ने बृहस्पति के पतले रिंग की और दो नए चंद्रमा खोजे थे।
  • 5 अगस्त 2011 को नासा द्वारा जूनो नामक एक अंतरिक्ष यान भेजा गया। यह यान इस ग्रह की संरचना, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र और ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र के बारे में जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से भेजा गया था। 5 साल बाद, यानी 5 जुलाई 2016 को, इस यान ने बृहस्पति के कक्षा में प्रवेश किया। यह मिशन सितंबर 2025 को समाप्त हो जाएगा।

सारांश

इस लेख में हमने सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है, इसके बारे में जानकारी देने का प्रयास किया। यदि यह लेख आपको अच्छा लगा हो तो कॉमेंट करना ना भूलें। यदि इस लेख में कोई त्रुटि हो तो आप हमें मेल कर सकते हैं। हम इस लेख में सुधार लाने का प्रयास करेंगे। जानकारी सही लगी हो तो इस लेख को अपने दोस्तों और प्रियजनों के साथ शेयर ज़रूर करें। यदि इस तरह के लेख आपको पसंद आते हों तो आप हमसे व्हाट्सएप के ज़रिए जुड़ सकते हैं।

FAQ’s

  • सौर मंडल में सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?

    सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति है। इसका व्यास और घनत्व दूसरे ग्रहों से अधिक है और इसमें कई उपग्रह भी हैं।

  • विश्व में कुल कितने ग्रह हैं?

    विश्व में कुल 8 ग्रह हैं: मेर्करी, वीनस, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शुक्र, शनि, और यूरेनस।

  • आंख को कौन से ग्रह दिखाई देते हैं?

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, सौरमंडल में यही ग्रह हैं जो समय-समय पर सबसे पास आते हैं: मंगल, बृहस्पति, और शुक्र यही ग्रह आपको आँख से दिखाई देते है।

  • सभी ग्रहों का राजा कौन है?

    बृहस्पति ग्रह को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है।

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